So why do I write in English

सो बात यूँ शुरू हुई के हम ओरहन पामुक के किताब इस्तानबुल पढ़ रहे थे। तभी ख्याल आया की भैया यह ओरहन तो काफी अच्छे अंग्रेज़ी लिखते हैं जब के तुर्की में सब का हाथ अंग्रेजी में थोडा  तंग है. फिर क्या था, गूगल मार दिया तो पता चला जनाब लिखते तुर्की भाषा में हैं और जो हम पढ़ रहे हैं वोह तो अनुवाद है अंग्रेजी में. इसी तरह हरुकी मुराकामी भी जापानी भाषा में लिखते हैं। और उनकी तरह बहुत सारे दुनिया के बेहतेरीन लेखक अपनी भाषा में लिखते हैं और बहुत हे अव्वल दर्जे का लिखते हैं तभी तो सारी दुनिया में उनका नाम है

पर दिमाग में एक प्रश्न बार बार आ रहा था के भारत के जाने माने आधुनिक  लेखक अंग्रेजी में क्यों लिखते है।  जब की रबिन्द्र नाथ टैगोर जो की साहित्य में नोबल पुरस्कार पाने वाले पहले गैर यूरोपीय थे वो बांगला में लिखते थे।

मौका मिला एक फेसबुक पोस्ट का और हमने चौका लगा दिया. सीना तान के लिख दिया के ” Orhan Pamuk ( noble prize winner) writes in Turkish, Haruki Murakami writes in Japanese, Arundhati Roy writes in English. And I wonder why ?” https://www.facebook.com/rahul.nainwal/posts/10151658860616434?notif_t=like

और क्या था लाइक्स एंड कमेंट्स की भीड़ लग गयी. वहीं हमारे मित्र अनुराग चथ्रत जी ने एक बड़ी बात लिखे दी ” The same reason why you and I write our posts in English and not हिंदी। यह पड़ते ही हमारी तो जैसे बोलती बंद हो गयी। यह तो मुझे भी नहीं पता के मैं अंग्रेज़ी में क्यों लिखता हूं तो अनुराग को कैसे पता चला ?

फिर क्या था हमने अपना मनपसंद काम शुरू कर दिया- सोचने का।

थोडा सोचा तो बात समझ में आई। पहला कारण तो साफ़ है. मैं बहुत सारे अन्य लोगों के तरह ढक्कन और पाखंडी हूँ। हिंदी पड़ता लिखता नहीं हूँ पर चाहता हूँ की बाकी सारे लोग पढ़े और लिखे।

दूसरा कारण शायद थोडा गहन और अंदरूनी है। बचपन से यह बात ठूंस ठूंस के दीमाग में भर दी गयी थी के अग्रेज़ी बोलने और लिखने वाले होशियार होते हैं और जिन्हें अंग्रेजी नहीं आते वो तो पढ़े लिखे अनपढ़ हैं। अभी भी याद है के कैसे अंग्रेजी बोलने के नाम से पसीने छूट जाते थे। बहुत मुश्किल से महनत मशक्कत कर के अंग्रेजी की थोड़ी पूंजी जोड़ी ताकी आगे नाक कटने से बच जाये।

जिन्दगी में पहली लडकी को प्रोपोस किया तो भी अंग्रेजी इस्तमाल करनी पढी आखिर शिमला के संत बीड्स की लडकी हिंदी वालों को भला क्यूँ घास डालती। हम ने जोश में जा के कह दिया की “I want to be friends with you”. उसने पुछा ” why” . इस का आंसर हम अंग्रेजी में याद कर के नहीं गए थे तो हम उलटे पैर वापस आ गए और जा कर रापेड़ेक्स इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स खरीद लिया ताके फिर ऐसे नौबत न आये.

सो अनुराग जी हम अंग्रेजी मैं इस लिए लिखते हैं की शायद अभी तक यह बात जहन मैं है की अंग्रेजी वाले होशियार और बाकी सब बेकार। जो थोड़ी बहुत सम्बन्ध हिंदी से था वोह माइक्रोसॉफ्ट वर्ड ने तोड़ दिया। हाँ बस कंप्यूटर और इन्टरनेट से यह फायदा हुआ के कंप्यूटर पे थोड़ी हिंदी और उर्दू पढने लग गए हैं. जान बचाते बचाते अंग्रेजी भी उलटना सीख गए।  आज अगर फिर कोई लडकी अगर why पूछे तो हम  why नोट बोलने से पीछे नहीं हटेंगे।  लेकिन देखो किस्मत का खेल की इस मामले में आज  कल लड़कियों का दिल जीतने के लिए हम उर्दू का इस्तमाल करते हैं और ग़ालिब के  शेर फरमाते हैं।

बाकी अरुंधती जी को बुकर और नोबल से प्यार हैं शायद इस लिए वोंग्रेज़ी में लिखती है और मेरी तरह वो भी जानती हैं की ” अंग्रेजी वाले होशियार और बाकी सब बेकार”.

गुलाम तो आखिर हम अभी तक हैं।

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