Uttarakhand Flood Relief- Update 2

We have raised close to 1.2 lacs in the last 30 hours of posting the appeal to raise money on the internet. Now we are thinking of how to make best use of this to help the people.

Our sources in the area and what we see in the newspapers suggest that  quite a few remote villages are not able to get any support from the Government or the NGOs. A lot of work in currently focussed on getting the pilgrims out from the area.

So one idea that we have is to immediately provide food packets ( rice, dal, spices, salt, tea, sugar, milk powder) and some basic medicine to the villages where no aid has reached so far.

We are hoping to collaborate with local administration in the Kedar Valley for the same.  These are initial thoughts. Would love to hear what you think we should be doing at the moment

200 से अधिक गांवों में भुखमरी के हालात

This is from Rashtriya sahara Newspaper.:

रुद्रप्रयाग/चमोली/उत्तरकाशी (एसएनबी)। शासन- प्रशासन का सारा ध्यान तीर्थयात्रियों पर केंद्रित है। इस कारण आपदा से प्रभावित गांवों की सुध कोई नहीं ले रहा है। आपदा से रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी के लगभग 200 गांव शेष दुनिया से कटे हैं। सड़क मार्ग के साथ ही यहां पैदल मार्ग भी ध्वस्त हो गये हैं और झूला पुल बह गये। इस कारण आपदा प्रभावित गांवो में खाद्यान्न की भारी समस्या हो गयी है। सबसे विकट स्थिति रुद्रप्रयाग की है। रुद्रप्रयाग के दर्जनों गांवों में भुखमरी की हालत है। इन गांवों का शेष दुनिया से संपर्क नहीं है। रुद्रप्रयाग संगम के पैदल पुल अलकनंदा नदी में समा जाने से पपड़ासू, मल्यासू, कोटली, बांसी गांवों का संपर्क मुख्यालय से कट गया है। वहां आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति न होने से लोगों के सामने भुखमरी के हालात हैं। श्रीनगर में निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना का बहाव रुकने से अलकनंदा व मंदाकिनी नदी पर लगे दर्जनों पुल एक ही झटके में नदी में समा गए और आज लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है। रुद्रप्रयागति लवाड़ा के बीच नोलापानी में 100 मीटर सड़क मंदाकिनी के तेज बहाव में समा जाने से आपदा से प्रभावित क्षेत्र तिलवाड़ा, सुमाड़ी में राहत एवं बचाव कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाये हैं। तिलवाड़ा से भीरी मोटरमार्ग के सिल्ली, विजयनगर, चन्द्रापुरी में ध्वस्त हो जाने से यातायात पिछले पांच दिनों से ठप है और सिल्ली, विजयनगर, चन्द्रापुरी झूलापुल के मंदाकिनी नदी में समा जाने से सिलगढ़, बड़मा, स्यूर बांगर क्षेत्रों का संपर्क कट जाने से जनता घरों में कैद हो गई है और प्रशासन सुध लेने को तैयार नहीं है। कुंड मोटरपुल के ढह जाने और कुंड 500 सड़कें, सैकड़ों पैदल मार्ग और 70 से अधिक पुल ढहे शेष दुनिया से कट गये 200 गांव प्रभावित गांवों की सुध लेने में प्रशासन नाकाम

ऊखीमठ मोटरमार्ग के जगह-जगह भूस्खलन की आगोश में आ जाने से जनता का संपर्क एक दूसरे से नहीं हो पा रहा है। रुद्रप्रयाग-गुप्तकाशी मोटरमार्ग के जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो जाने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। उधर, चमोली जिले में भी हालात बदतर ही हैं। थोड़ी राहत की बात यह है कि लोनिवि ने गोविंदघाट व भ्यूंडार में अस्थायी पुल बना दिए हैं। थराली प्रखंड के गांवों को जोड़ने वाले झूला पुल भी बर्बाद हो गए हैं और दर्जनों गांवों में खाद्यान्न का संकट हो गया है। नलगांव से देवाल तक का मार्ग कहीं भी आवाजाही के लिए सुरक्षित नहीं है। देवाल प्रखंड के ओडर, लिंगड़ी, तोरती, रामपुर, हरमल, हिमनी, पिनाऊ, घेस, वलाण में भी मोटर तथा अश्व मागरे के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर अब खाद्यान्न आपूर्ति नहीं हो पा रही है। हरमनी के पास पैनगढ़ पुल के ढहने से कई गांवों का संपर्क कट गया है। घोड़ागाड पुल बह चुका है। इसके अलावा नलगांव से देवाल तक मार्ग टूटा है। यहां 22 गांवों का संपर्क कटा हुआ है। उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है। इसके अलावा संगमचट्टी क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से कट गया है। लम्बगांव से बदरीनाथ मार्ग ठप है। भटवाड़ी क्षेत्र में तीन दर्जन से भी अधिक गांवों में पहुंचना मुश्किल हो गया है। टिहरी जिले में अधिकांश आंतरिक मोटर मार्ग ठप हैं। बांध क्षेत्र से सटे धारमंडल व रैका पट्टी के अधिकांश गांवों में सड़क मार्ग ठप होने से गांवों तक खाद्यान्न की आपूर्ति नहीं की जा सकी रैका धारमंडल के मोटणा, मदननेगी मोटरमार्ग बंद रहने से मदन नेगी रिंडोल, खांड, जलवालगांव, कंगसाली, रजाखेत, धारमंडल, म्यूंडा, ननवा, सारगूल सहित ढुगमंदार क्षेत्र के कई गांवों में आवाजाही ठप है। घनसाली टिहरी प्रतापनगर मोटरमार्ग के सेन्दुल में

भारी वाहनों के लिए बने पुल के क्षतिग्रस्त होने से ढुगमंदार व रैका धारमंडल में खाद्यान्न नहीं पहुंच रहा। मंदार कस्तल, ढुंग, लासी, कुमार गांव सहित 27 से अधिक गांवों में भी यातायात व्यवस्था ठप है। उधर, भिलंगना प्रखंड के घनसाली बुढाकेदार, लंबगांव-कोटाल गांव-चमियाल, सेन्दुल पटुडगांव व घनसाली अखोडी सहित कई मोटरमार्ग अब तक बंद है। जौनपुर प्रखंड के अगलाड, लालूर पट्टी व इडालूसु मोटर मार्ग भी जगह-जगह क्षतिग्रस्त है जिससे क्षेत्र के लगभग 150 गांवों का आपस में संपर्क टूटा हुआ है। थौलधार के मैंडखाल-बंगीयाल, कमांद थौलधार, मैंडखाल- गैरनगुण, स्यांसू नकोटा खोली, स्यांसू रतवाडी कमांद, किल्यिाखाल उप्पू मोटर मागरे पर पूरी तरह से आवाजाही ठप है। आपदा से पौड़ी जिले के 177 मोटरमागरे में से 127 मार्ग बंद हैं।

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